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मुझे याद आता है अपना बचपन सुहाना

Atmaram Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे याद आता है बचपन सुहाना
        
                                                    
                            
नानी की कथडी वो बिस्तर पुराना।
नांद में नहाना, कुए से पानी लाना
दूद छिरिया का पीना मस्ती में जीना
वो लालटेन,चिमनी, वो चूल्हे का जमाना
मुझे याद आता है अपना बचपन सुहाना 
ननिहाल जाना, आम-महुआ को बीन लाना उफनती नर्मदा का सफर, लगता था सुहाना मल्लाह का नाव में बाधवान लगाना वो बारिस की झडी वो बाढ़ का जमाना
खेत जंगलों की गलिया सब जाना पहचाना।।2।। मुझे याद आता है अपना बचपन सुहाना
घर-घर दूद के तसले दही घी का खजाना नानी मामाओं का शहर बेचने जाना नर्मदा की मंझधार में दूद चढ़ाना
बच्चों की बत्तू लाना,बर्तन मॉज लाना।। मुझे याद आता हैअपना बचपन सुहाना 
गईया की सार में किंची अंटी खेलना,
अंटे को कुहनी से गुच्चू में ढकेलना
संगी साथी बन मामाओं का मुझे झेलना,
मुझे जिताने आखिरी तक खेलना
गल्तियो को मेरी वो अपने सर लेना।
मुझे याद आता है अपना बचपन सुहाना।


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