बंद दरवाजा चारदीवारी,
ऑखों में पानी,
हर कैदी की यही कहानी
ऊंची ऊंची दीवालों के घेरे,
यह सब है सरकारी डेरे
जेल है ये अपराधियों की राजधानी
मुश्किल घडी का सख्त पहरा
रात दिन रहता घनघोर अंधेरा,
कब कटेगा अंधकार, बोले सभी जुवानी
अजीव हुई जिंदगी की दौड,
मुलाकात बिना खत्म होता दौर
आया न संदेशा, आया आंखों में पानीा
मिलता नहीं पेट भर खाना
कैसे जीते है किसको बताना
दिल के दर्द की कोई समझे न बानी
कब दिन निकला
कब रात आयी
हर रात काली ,जिसकी काली ही कहानीा
पहरेदारों की,होती करनी काली
हर प्रहर की,होती राते और काली
पहरेदारों की,जितनी करनी काली
उतनी कोठरियों में,गूंजे उनकी गालीा
चारदीवारी मे, सख्त पहरा है
मरने जीने का घाव गहरा है
शासन ने झौकी, सुरक्षा में ताकत भारीा
किस ऐब ने फरेब ने मुझे जकडा था
राजनैतिक षड्यंत्र का जाल बडा तगडा था
पीव सुनी नहीं पुलिस ने, न कोर्ट ने मानी
हथकडिया कलाई में है और जेल की ठानी
काली कोठरियों के सींखचों को
सुनाता हूं मैं अपनी कहानी
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