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मिलन की आस

Ashutosh Amit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मीलों तक सन्नाटा है,
        
                                                    
                            
सपनों की सूनी डगर, रास्ते हैं सूने।
ऐसे में अब किसको खबर?
मोर, पपीहा, चातक गाये,
मधुमास अब बीता जाये,
यौवन मेरा रीता जाये।
ताकें अखियाँ पथराई सी,
डसती नागिन पुरवाई भी,
आज न आये बालम मेरे।
झरी बदरिया झर-झर बरसे,
तुम बिन ये दृग कब से तरसे।
चाह मिलन की, दूर हैं प्रीतम,
कितना कोई खुद को समझाये!
एक महीने पहले
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