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तुम आओगे एक दिन, मुझे यक़ीन है।

Ashutosh Amit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज मैं अकेला हूँ,
        
                                                    
                            
आस-पास कोई नहीं
मेरी यादों के भी सिवा।
दरो-दिवार चुप हैं,
सब-यह सब चुप हैं,
खिड़कियों से आती हवा...
चहुँ ओर सन्नाटा सा पसरा है
आज आहटों में।
ऐसे में तुम और भी याद आती हो,
तेरी बदमाशियाँ, तेरा अपनापन रुलाता है मुझे।
गली से नुक्कड़ तक बैठी तेरे आने का
वक़्त पूछती है,
तुम आओगे एक दिन, मुझे यक़ीन है।
3 घंटे पहले
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