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हिंदुस्तान जगे

Ashish Singh Jadon

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भोर हुई सूरज जागा, जागा राणा प्रताप का भाला...
        
                                                    
                            
जागा भारत का हर वो वीर, जागा वो वीर शिवाजी मराठा...
जागा शरीर का वो रोम रोम, जागा शरीर का वो ताना बाना..
जागी वो झांसी की रानी, जागी वो दुर्गा चामुंडा काली..
जागा पद्मिनी(पदमिनी) का वो जौहर, जागा तान्हाजी का रण जाला...
जिससे भारत माता को हो रक्त लाल, जागा भारत माता का वो हर लाल...
शेरों की वो दहाड़ जगे, हाथियों की वो गूंज उठे...
सुबह उठी वो लोरियां..,उनकी(जिनकी) छाती का वो राम जगे...
हर राधा का वो श्याम जगे,, मीरा का वो घनश्याम जगे..
जागे भारत की धरती तब भारत का अम्बर सोए, सोए जब भारत की धरती तब भारत के अम्बर का हर तारा जागे ..
जागे भारत की प्रकृति का वो चक्र, जागे वो अशोक चक्र ...
जिसने समय को जगाया था,, चारों दिशाओं में भारत के शेरों को दौड़ाया था...
जागे आंखों में सूरज की वो रोशनी, जिससे हर कवि का वो हाथ जगे...
भारत का हर वो वीर जगे,, जिसने मां को है दिल में पाला...
शेरावाली का वो शेर जगे.., हनुमान का हर भक्त जगे...
रविवार को सब सोते है ...पर वीर सेनानी सूरज के वार को जगते है ...
आज उठा हूं पैरों पर, भारत मां पर मर मिटकर शीश चढ़ाकर (उठाकर) जागूंगा...
मां की आंखों का हर आंसू जागे,, हर दिल में समुद्र का तूफान जगे...
आज भोर हुई सूरज जागा,, और सारा हिंदुस्तान जगे..
सारा हिंदुस्तान जगे,, हिंदुस्तान जगे...
2 घंटे पहले
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