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सच्चा प्यार

Ashish Jain

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार का मतलब नहीं यहाँ सुहागरात हैं
        
                                                    
                            
अनुराग के संग आती यहाँ विराग की भी रात हैं
उस प्यार को उद्धव भला क्या समझ पाएगा
दूर दूर रहते भी राधा- कृष्ण साथ हैं
इस समाज की मर्यादा जो निभाने हम चलें
हम नदी के दो किनारे मिलकर के भी नहीं मिले
पर प्यार की बहती धारा में कुछ तो खास बात हैं
दूर दूर रहते हुए भी राधा-कृष्ण साथ हैं
शरीर ही दो हमारे पर धड़कता एक ही दिल है
विश्वास , भक्ति और समर्पण का बनाया ऐसा बिल है
सात समुन्दर पार भी लगता जैसे सहायक तेरा हाथ है
दूर-दूर रहते हुए राधा-कृष्ण साथ हैं
शादी के बन्धन में बधा चाहे नहीं हमारा आज हैं
प्यार में जरुरी होता बनना प्रयागराज हैं
प्रीति की परीक्षा तभी हैं जब आती वैराग्य की रात हैं
दूर- दूर रहते हुए भी राधा-कृष्ण साथ हैं
शरीर का मिलना नही यहाँ कोई महत्वपूर्ण हैं
औरत खाने का नहीं यहाँ कोई होती चुर्ण हैं
इस नश्वर संसार में प्यार अमरता की सौगात हैं
दूर -दूर रहते हुए भी राधा - कृष्ण साथ हैं


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6 वर्ष पहले
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