जिधर नज़र गयी ख़्वाब
टुकड़े टुकड़े हैं।
बड़ी तमन्ना से मेरी आंखों
ने सजाएं थे।।
कोई नज़र ना मिली ज़िंदगी
गुज़रतीं गयी।
ना हीं फिज़ा में घुली प्यार
की सदाएं हैं।।
ज़ख़्म ऐसे मिले कि दिल के
वो लिबास हुए।
नमीं पलक में है और यादों
की बौछारें हैं।।
कोई आहट नहीं गलियां भी
दिल की सूनी है।
सरे-ख़्याल में बड़ी सर्द सी
हवाएं हैं ।।
बड़ी बेरंग हो चली है
ज़िंदगी हर सू।
हर अक़्स आंखों को लगे
पराये है।।