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जौहर था एक-मात्र उपाय

Arvind Kumar Garg

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुतों से सुनी वीरों के बलिदान की वीरगाथाएं
        
                                                    
                            
पर कुछ कम नहीं रही मेरे भारत की वीरांगनाएँ
जब दौलत और शोहरत लूटने को विदेशी आक्रांता भारत आए
तब किन परिस्थितियों में हँसते हँसते अपने प्राण गवाए
शायद इस बलिदान को हम आम इंसान नहीं सराह पाएँ
कुछ कम नहीं रही मेरे भारत की वीरांगनाएँ

जब रणभूमि में रणबाँकुरे बन जाते युद्धबंदी या प्राण गवाएँ
तब निडर बनकर सामने आई मेरे देश की वीरांगनाएँ
अस्मिता,परिवार की प्रतिष्ठा, संस्कृति और आत्मसम्मान बचाए
जब आत्मसमर्पण के बाद भी, उनके साथ किया जाता था बलात्कार
बेचा जाता था या विजेताओं को दे दिया जाता था उपहार
मृतक को भी नहीं करेंगे माफ, तब मौत का आलिंगन था एक-मात्र उपाय
कुछ कम नहीं रही मेरे भारत की वीरांगनाएँ

अपमान,हिंसा, शारीरिक और मानसिक अत्याचार से बचने के लिए
नहीं था अन्य कोई विकल्प, तब सामूहिक आत्मदाह के मार्ग अपनाए
जिससे आक्रमणकारी शारीरिक रूप से अपवित्र करने का मौका न पाएं
और दासी और पत्नी बनाने के लिए बेचकर न लाभ उठा पाएं
आत्मसमर्पण नहीं, जो मृत्यु से भी था भयानक,
आक्रमणकारियों के विरूद्ध जौहर कर विरोध जताए
कुछ कम नहीं रही मेरे भारत की वीरांगनाएँ

खालसा,अगलासीस, राजपूत, कंपिली,काठी महिलाओं ने जौहर अपनाए
प्रसिद्ध हैं रणथंभौर, चित्तौड़, चंदेरी, ग्वालियर,
जैसलमेर की जौहर करने वाली महिलाएँ
शाका मे, जौहर के पश्चात पुरूषों को भूखे शेरों की तरह टूट जाने
और अधिक भीषण और अंतिम युद्ध करने को प्रेरित करती थी महिलाएं
कुछ कम नहीं रही मेरे भारत की वीरांगनाएँ
एक महीने पहले
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