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काश, ऐसा होता ।

Arvind Krishnarjun

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                            हम जो चाहे वो मिल जाएं,
        
                                                    
                            
खुशी के द्वार खुल जाएं।
फिर हर कोई यही सपने संजोता
काश, ऐसा होता ।

मेहनत के बिना कुछ मिलता नहीं,
नसीब का ताला खुलता नहीं।
संघर्ष से सफलता तक जो अपने पथ से हिलता नहीं,
भाग्य भरोसे फिर कोई नहीं रोता,
काश, ऐसा होता ।

कस मुट्ठी में तकदीर को,
तोड़ दे हर जंजीर को ।
सब कुछ मिलता है फकीर को,
बदल दे हाथों के लकीर को।
हर शाम के बाद, एक नया सवेरा होता,
काश, ऐसा होता।
4 घंटे पहले
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