मन एक मीठी झील है
इसमे दर्द की एक कन्दील है
तुम अलग हो मुझसे
ये जानता हूँ मैं
दिल के अपने दर्द सभी
पहचानता हूँ मैं
वह पनघटों पर नाचना
वह बारिशों मे भीगना
रूठ कर अक्सर तेरा
भोंये समेटे झीझना
रूह से सटकर तेरा
मेरे लबों को झेड़ना
चौपाल पर सुबह ही
तेरी अठहेलियों को झेलना
उन्ही यादों मे दिल तल्लीन है
मन एक मीठी झील है
इसमे दर्द की एक कन्दील है
कुँवर अरुण
सिलहरी सहसवान बदायूं
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