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मन एक मीठी झील है

Arun Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन एक मीठी झील है
        
                                                    
                            
इसमे दर्द की एक कन्दील है

तुम अलग हो मुझसे
ये जानता हूँ मैं
दिल के अपने दर्द सभी
पहचानता हूँ मैं

वह पनघटों पर नाचना
वह बारिशों मे भीगना
रूठ कर अक्सर तेरा
भोंये समेटे झीझना

रूह से सटकर तेरा
मेरे लबों को झेड़ना
चौपाल पर सुबह ही
तेरी अठहेलियों को झेलना

उन्ही यादों मे दिल तल्लीन है
मन एक मीठी झील है
इसमे दर्द की एक कन्दील है

कुँवर अरुण
सिलहरी सहसवान बदायूं

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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