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परिंदे

Arti tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो परिंदे जो घर आया ना करते थे कभी,
        
                                                    
                            
आज उनका लौट आना ज़िन्दगी बन गया है।
बचपन में देखा था, डाली पर बतियाते थे,
कोई नाचता था, मिलकर गीत गाते थे,
कुछ दूर जो हम आ गए, खो गए थे सभी,
आज फिर चहचहाना, ज़िन्दगी बन गया है।।
बरसों बाद फिर इजहार किया है उन्होंने।
बेमतलब फिर से प्यार किया है उन्होंने।
घरौंदे अब ना तोड़ दें हम, रूठ जाएंगे हमसे।
उनका नजर आना, ज़िन्दगी बन गया है।।


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6 वर्ष पहले
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