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अंतस का संगीत

Aparajit Nandi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम यहाँ हैं, नज़रें दूर तलाशती हैं,
        
                                                    
                            
हवा में घुली खुशबू कहीं और भागती है।
लगता है हर लम्हा, कि गलत ठौर आ गए,
मंज़िल की चाह में, राह के रंग भुला गए।
सोचो अगर चुटकी बजाते, उस पार भी चले जाओ,
क्या गारंटी है, कि वहाँ सुकून पाओ?
मन फिर बुनेगा कोई नया फ़रेब, नया किनारा,
कि काश! मिला होता कोई और सहारा।
"मैं कहाँ फँसा हूँ"

यही सोच दोहराते हो,
जहाँ मौजूद हो, उस जगह से कतराते हो।
जो हाथ में नहीं, उसकी फ़िक्र में जलते हो,
और जो सामने है, उसे खोकर आगे बढ़ते हो।
छोड़ दो वो बागडोर, जो तुम्हारे काबू में नहीं,
हर राह का हर मोड़, तुम्हारे हिसाब से सही नहीं।
साँस जो चल रही है अभी, उसे खुलकर महसूस करो,
जहाँ हो आज, वहीं मुस्कुरा कर जीना शुरू करो।
 
6 घंटे पहले
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