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जब लगा वक्त थम सा गया

anuradha sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब लगा वक्त थम सा गया
        
                                                    
                            
रूह का जिस्म से जैसे अलगाब
हो गया
खुले गगन में उड़ता पंक्षी जैसे
पिंजरे में कैद हो गया
रंगों से भरा जीवन फिर वेरंग हो गया
हर अपना भी पराया लगने लगा
नई सोच पर तो जैसे पाबंद ही
लग गया
नहीं कोई उम्मीद ,नहीं कोई जज्बात रहा
चारों तरफ बस मातम का पहरा लगा l

Anuradha vinay udainiya
Datia Madhya Pradesh
 
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