चिड़ियों को जरा चहकने दो।।
फूलों को जरा महकने दो।।
फागुन का रंग बिखरने दो।।
ऋतु बसंत को जरा आने दो।
जब चैत्र शुक्ल के प्रथम दिवस को।
नव वर्ष मनाया जाएगा।।
हर दिल होगा हर्षित मन से।।
हर घर जय गान सुनाया जाएगा।।
जब प्रकृति दुल्हन का रूप धरकर।।
इस धरा पर प्रेम सुधा बरसाएगी।।
हर विटप तडाग होगा फूलों से मन भावन।
चहुं और खुशहाली छाएगी।।
उस चन्द्र मास का अभी इंतजार करो।।
मन में तुम सब तनिक विचार करो।।
हो जाए इस साल तुम्हें देखकर निष्तब्द सभी।।
इस साल तुम कुछ ऐसा नया करो।।
-अंशुल शाक्य