विज्ञापन

रात भर लिखता रहा

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात भर लिखता रहा तुम मेरे नहीं हो
        
                                                    
                            
सहर हुई, अपनी तहरीर खुद ही मिटा रहा हूं

जो ख़्वाब बिखरे पड़े थे आँखों में कहीं
कल रात से अब उनकों फिर सजा रहा हूं

जानता हूं पलट कर तुम न देखोगे कभी
फिर भी सदायें तुमको दिए जा रहा हूं मैं

रात भर जिनके लिए बरसती रही थीं
अब उनसे फिर निगाहें मिला रहा हूं मैं

वो बोलकर गया था कि न लौटेगा कभी
न जाने क्यों फिर भी उसे बुला रहा हूं मैं

रूठ गई थी मुझसे मेरी तक़दीर
तेरी ही तरह उसे भी अब मना रहा हूं मैं

वफ़ाओ के कुछ बुझते दीये अब भी बचे हैं
आहों की तपिश से उन्हें फिर जला रहा हूं मैं

कल रात जिन ज़ख्मों पे रोता रहा था मैं
आज फिर उन्हीं से खुद निभा रहा हूं मैं

शम्मा-ए-उम्मीद जो तेरे आने पे जली थी
जाने पे तेरे उनको अब बुझा रहा हूं मैं

कल तक जिन ख़्वाबों के लिए मांगी थी दुआ
उन्हीं के सच होने से क्यों घबरा रहा हूं मैं

सोचा था ये कहेंगे, वो कहेंगे हम
बातें ज़रूरी छोड़ सब बता रहा हूं मैं

हाथों से मेरी छूटती जाती है ज़िंदगी
देकर उसे आवाज़ फिर बुला रहा हूं मैं।
-अनमोल
12 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

SATYENDRA KUMAR

112 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8651 कविताएं

View Profile