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लफ्ज़ कुछ हमने उठाए और ग़ज़ल कह दी

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लफ्ज़ कुछ हमने उठाए और ग़ज़ल कह दी
        
                                                    
                            
हाल हम अपना सुनाये और ग़ज़ल कह दी

जब कभी ग़मगीन बादल ने है घेरा हमको
अश्क कुछ हमने बहाये और ग़ज़ल कह दी

यूं ही ख़ामोशी से दिल की चोट सहते हैं
दर्द को दिल में छुपाये और ग़ज़ल कह दी

कुछ दिनों तक तो मनाया दुख यहां हमने
फिर नए सपने सजाये और ग़ज़ल कह दी

अपने ही लोगों की जमघट में गये जब भी
हम गए इतने सताये और ग़ज़ल कह दी।
-अनमोल
5 घंटे पहले
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