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लफ्ज़ कुछ हमने उठाए और ग़ज़ल कह दी

                
                                                         
                            लफ्ज़ कुछ हमने उठाए और ग़ज़ल कह दी
                                                                 
                            
हाल हम अपना सुनाये और ग़ज़ल कह दी

जब कभी ग़मगीन बादल ने है घेरा हमको
अश्क कुछ हमने बहाये और ग़ज़ल कह दी

यूं ही ख़ामोशी से दिल की चोट सहते हैं
दर्द को दिल में छुपाये और ग़ज़ल कह दी

कुछ दिनों तक तो मनाया दुख यहां हमने
फिर नए सपने सजाये और ग़ज़ल कह दी

अपने ही लोगों की जमघट में गये जब भी
हम गए इतने सताये और ग़ज़ल कह दी।
-अनमोल
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3 घंटे पहले

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