विज्ञापन

बुरा वक़्त (नज़्म)

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां कभी-कभी बुरा वक़्त आना भी ज़रूरी है
        
                                                    
                            
ये भी एक दौर है, इससे गुज़र जाना भी ज़रूरी है

ख़ुद को जानने का एक ये नायाब मौका है
क्या ताक़त है क्या कमज़ोरी है
ये हम जान जाते हैं
कौन अपने हैं, कौन नहीं
ये भी तो पहचान जाते हैं

बहुत से चेहरों से ये पर्दे उठा देता है
असलियत क्या है, हमको ये बता देता है
बेवजह सर पर जो ग़ुरूर छाया होगा
एक झटके से उसको ये हटा देता है

वो जो बादल से लदे रहते हैं अश्कों के पलकों पर
उनको बरसने का ये एक मौका है
जो छोटी छोटी खुशी हम नकार देते हैं
सच कहो तो उनको तरसने का ये एक मौका है

ये एक मौका है कभी ख़ुद से बात करने का
हां अपने आप से कभी मुलाकात करने का
जो धूल सी पड़ी हुई रहती है आंखों में
ये एक मौका है उसको साफ़ करने का

ये और बात है कि ये अच्छा नहीं लगता हमको
बताओ क्या कभी कोई
कड़वी दवा अच्छी भी लगी है
पर हां हर कड़वी दवा हमें दुरुस्त
करने की सीढ़ी ही तो है
और ये एक ऐसी ही कड़वी दवा है

जब अच्छा नहीं टिका
तो ये क्या टिकेगा
कौड़ियों के भाव अब
ये भी बिकेगा
आयेगा वक़्त इसके भी गुज़रने का
आयेगा वक़्त अपना भी नसीब संवरने का।
-अनमोल
9 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12584 कविताएं

View Profile

Atul Sharma

337 कविताएं

View Profile