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वर्षा सुंदरी

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धुल गए पाप पवन पानी में
        
                                                    
                            
नहाया मैं बरसात के पानी में
दृग मेरा टिका था सयानी में
बरसा सुंदरी नाची छम छमा छम
बरसा सुंदरी बरसी झम झमा झम
न बादल छाए
न बादल आए
झम झम बरसा पानी
इस बरसा में बही राजधानी
बरसा हर बार रचती नई कहानी
गरीबों की चुई पलानी
बही छानी और पलानी
बरसा सुंदरी दिखाई जवानी
खुश हुए किसान
और मजदूर जवान
खुश हुई किसानी
इधर पानी उधर पानी
हुई अवनी आज पानी पानी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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