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वर्षा सुंदरी

                
                                                         
                            धुल गए पाप पवन पानी में
                                                                 
                            
नहाया मैं बरसात के पानी में
दृग मेरा टिका था सयानी में
बरसा सुंदरी नाची छम छमा छम
बरसा सुंदरी बरसी झम झमा झम
न बादल छाए
न बादल आए
झम झम बरसा पानी
इस बरसा में बही राजधानी
बरसा हर बार रचती नई कहानी
गरीबों की चुई पलानी
बही छानी और पलानी
बरसा सुंदरी दिखाई जवानी
खुश हुए किसान
और मजदूर जवान
खुश हुई किसानी
इधर पानी उधर पानी
हुई अवनी आज पानी पानी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
56 मिनट पहले

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