स्वयं को अभी और तपाना होगा
तुमको तप कर कुंदन बन जाना होगा
स्वदेश के लिए कुछ करके दिखाना होगा
सारे संसार को बदल कर जाना होगा
हृदय में कोमल कलियों को खिलाना होगा
समाज में नव बसंत ऋतु लाना होगा
हर हृदय में परम पावन प्यार जगाना होगा
प्यारे हमारे हिंदुस्तान को पुनः विश्वगुरु बनाना होगा
स्वयं को और अभी तपाना होगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'