आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

स्वयं को तपाना होगा

                
                                                         
                            स्वयं को अभी और तपाना होगा
                                                                 
                            
तुमको तप कर कुंदन बन जाना होगा
स्वदेश के लिए कुछ करके दिखाना होगा
सारे संसार को बदल कर जाना होगा
हृदय में कोमल कलियों को खिलाना होगा
समाज में नव बसंत ऋतु लाना होगा
हर हृदय में परम पावन प्यार जगाना होगा
प्यारे हमारे हिंदुस्तान को पुनः विश्वगुरु बनाना होगा
स्वयं को और अभी तपाना होगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर