मन मंदिर में हैं घंटे हजार
इनमें गूंजा दो देश प्यार
झंकृत कर दो वीणा के तार
सुंदर सुंदर सपनों से सजाओ सारा संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'