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संध्या सुंदरी

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नीचे धरती, ऊपर आकाश
        
                                                    
                            
बीच में सूरज का प्रकाश
अंबर के चादर तान
अवनी करती विश्राम
संध्या सुंदरी होते ही शाम
आती छोड़ कर आसमान
सबका करने को कल्याण
देने को जग को आराम
आती है भर कर मुस्कान
इसका कहां से लाऊं मैं उपमान?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
12 घंटे पहले
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