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संध्या सुंदरी

                
                                                         
                            नीचे धरती, ऊपर आकाश
                                                                 
                            
बीच में सूरज का प्रकाश
अंबर के चादर तान
अवनी करती विश्राम
संध्या सुंदरी होते ही शाम
आती छोड़ कर आसमान
सबका करने को कल्याण
देने को जग को आराम
आती है भर कर मुस्कान
इसका कहां से लाऊं मैं उपमान?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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2 घंटे पहले

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