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प्लेटफॉर्म जगता है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खड़ा हो कर
        
                                                    
                            
रेलवे प्लेटफॉर्म पर
देखा मैंने, रात भर
यह जगता है
दिन भर यह जगता है
कोई टहलता है
कोई दौड़ता है
कोई सोता है
कोई जगह जोहता है
जीवन एक सफर है
कठिन यह डगर है
चलना हर प्रहर है
जो चलता रहता है
भाग्य उसका चलता है
जो सोता है
भाग्य उसका सोता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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