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प्लेटफॉर्म जगता है

                
                                                         
                            खड़ा हो कर
                                                                 
                            
रेलवे प्लेटफॉर्म पर
देखा मैंने, रात भर
यह जगता है
दिन भर यह जगता है
कोई टहलता है
कोई दौड़ता है
कोई सोता है
कोई जगह जोहता है
जीवन एक सफर है
कठिन यह डगर है
चलना हर प्रहर है
जो चलता रहता है
भाग्य उसका चलता है
जो सोता है
भाग्य उसका सोता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
57 minutes ago

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