विज्ञापन

पेड़ पौधे बतियाते हैं

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पेड़ पौधे मुझसे नित बतियाते हैं
        
                                                    
                            
इनकी भाषा सभी समझ कहां पाते हैं?
लोग मुझे पागल समझते हैं
पर पेड़ पौधे मुझको समझते हैं
प्रेम की भाषा सभी कहां समझते हैं?
मुझसे गए हुए लोग बतियाते हैं
बड़ा बेटा रोज मुझसे बतियाता है
कभी सपने में वह आता है
कभी जोर से वह चिल्लाता है
कभी वह मेरे गोद में सो जाता है
कभी हाथी पर बैठकर आता है
कभी वह मुझे पढ़ाता है
कभी वह हाथ बढ़ाता है
जग क्या समझेगा प्यार की भाषा?
जग क्या समझेगा भगवान की भाषा?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
16 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Dasani

15 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12768 कविताएं

View Profile

Shivendra Mishra

4 कविताएं

View Profile

Radheshyam Khatik

12 कविताएं

View Profile