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पेड़ पौधे बतियाते हैं

                
                                                         
                            पेड़ पौधे मुझसे नित बतियाते हैं
                                                                 
                            
इनकी भाषा सभी समझ कहां पाते हैं?
लोग मुझे पागल समझते हैं
पर पेड़ पौधे मुझको समझते हैं
प्रेम की भाषा सभी कहां समझते हैं?
मुझसे गए हुए लोग बतियाते हैं
बड़ा बेटा रोज मुझसे बतियाता है
कभी सपने में वह आता है
कभी जोर से वह चिल्लाता है
कभी वह मेरे गोद में सो जाता है
कभी हाथी पर बैठकर आता है
कभी वह मुझे पढ़ाता है
कभी वह हाथ बढ़ाता है
जग क्या समझेगा प्यार की भाषा?
जग क्या समझेगा भगवान की भाषा?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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