समय सुबह का अनुपम अलबेला
प्रकृति सुंदरी करती खूब खेला
यह पावन पवन अनमोल
इसको पैसे से मत तोल
चल अकेला
टहल अकेला
स्वास्थ्य धन अनमोल
देती प्रकृति अमृत घोल
चल उठ छू
प्यार भरी भू
रह स्वस्थ तू।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'