जहां गंगा का मैदान है
जहां भृगु स्थान है
जहां बलि स्थान है
जहां मंगल पांडे का जन्म स्थान है
जहां चित्तू पांडे का जन्म स्थान है
जहां चम चम चमकी तलवारें
जहां आकर अंग्रेज हारे
जहां ददरी मेला लगे
जहां की धरती हीरा लगे
जहां के लोग लंबे चौड़े
जहां के लोग रखते दिल लंबे चौड़े
जहां दिखता स्वाभिमान है
जहां खुला आसमान है
जहां घर-घर में राम सीता हैं
जहां लोग गाते गीता हैं
जहां की धरती पावन पुनीता है
जहां "वतन के नाम" "बागी बलिया"
"बलिया की मिट्टी" के रचनाकार हैं
जहां खिले स्वदेश प्यार की कलियां
जहां हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे रचनाकार हैं
जहां के लोगों का मानवता से प्यार है
वह बागी जिला है
जिससे जग हिला है
जहां जीत का सिलसिला है
वह मेरा बलिया जिला है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'