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मैं शहर आया

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर द्वार छोड़ कर शहर आया
        
                                                    
                            
लक्ष्य बहुत बड़ा बनाया
कुछ खोया, कुछ पाया
पर गांव को भूला न पाया
गांव में जो सुख शांति पाया
वह सब शहर आकर गंवाया।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
3 घंटे पहले
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