घर द्वार छोड़ कर शहर आया
लक्ष्य बहुत बड़ा बनाया
कुछ खोया, कुछ पाया
पर गांव को भूला न पाया
गांव में जो सुख शांति पाया
वह सब शहर आकर गंवाया।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'