विज्ञापन

मैं बागी बलिया वाला

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरा तन हिंदुस्तानी
        
                                                    
                            
मेरा मन हिंदुस्तानी
मेरा गगन हिंदुस्तानी
मेरा रक्त है हिंदुस्तानी
मेरे रग रग में
मेरे नस नस में
बह रहा मां गंगा का पानी
बह रहा गर्म रक्त हिंदुस्तानी
मैं बागी बलिया वाला
मैं बागी बैरिया वाला
है साहस मेरी राजधानी
रचता मैं वीरता की कहानी
है चाल मेरी तूफानी
मेरे वतन में
मेरे मन में
सुबह सुबह बोले कोयलिया
कहे कुहूक के," चल बलिया "
सुबह सुबह कोयल काली बोले
मेरे मन में मिस्री रस घोले
गाए गौरव गान हिंदुस्तानी
गाए राष्ट्रगान, मधुर वाणी
सुने मन मेरा
गुने मन मेरा
कहे, "बनो बलिदानी
रचो वीरता की कहानी
चलो,चाल हिंदुस्तानी
करो कमाल हिंदुस्तानी।"
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7417 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13199 कविताएं

View Profile