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मैं बागी बलिया वाला

                
                                                         
                            मेरा तन हिंदुस्तानी
                                                                 
                            
मेरा मन हिंदुस्तानी
मेरा गगन हिंदुस्तानी
मेरा रक्त है हिंदुस्तानी
मेरे रग रग में
मेरे नस नस में
बह रहा मां गंगा का पानी
बह रहा गर्म रक्त हिंदुस्तानी
मैं बागी बलिया वाला
मैं बागी बैरिया वाला
है साहस मेरी राजधानी
रचता मैं वीरता की कहानी
है चाल मेरी तूफानी
मेरे वतन में
मेरे मन में
सुबह सुबह बोले कोयलिया
कहे कुहूक के," चल बलिया "
सुबह सुबह कोयल काली बोले
मेरे मन में मिस्री रस घोले
गाए गौरव गान हिंदुस्तानी
गाए राष्ट्रगान, मधुर वाणी
सुने मन मेरा
गुने मन मेरा
कहे, "बनो बलिदानी
रचो वीरता की कहानी
चलो,चाल हिंदुस्तानी
करो कमाल हिंदुस्तानी।"
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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