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कविता ऐसे बनती है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुक मिले
        
                                                    
                            
छंद मिले
संदेश मिले
कल्पना विचार हो
ताल,लय,छंद अपार हो
तब कविता बनती है
तब एक दुनिया बनती है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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