है दुःख कौन जो ईश्वर कृपा से मिट नहीं सकता?
है दुःख कैसा जो उनकी कृपा से सिमट नहीं सकता?
कर्ता वही,भर्ता वही झूठा श्रेय जमाना लेता है
दुःख सुख सब वही देता है, दुःख वही हर लेता है
कभी चिकित्सक श्रेय लेता है
कभी कोई संत श्रेय लेता है
कभी कोई कभी कोई श्रेय लेता है
पर बुद्धिमान सारा श्रेय उन्हीं को देता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'