होंठों पर स्वदेश का नाम हो
करों में स्वदेश सेवा के काम हों
एक हाथ में तिरंगा हो
एक हाथ में गंगा हो
है यही मेरा अरमान
बच जाए हमारा ईमान
विकसित हो हिंदुस्तान
गलत सही का हो ध्यान
हों सभी समान
आंखों में हो आसमान
से ऊंचा अरमान
हो आसमान
से ऊंचा स्वाभिमान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'