धन्य धन्य बा गया नगरी
बसल बा जहानाबाद के कगरी
बसल बा निरंजना नदी के कगरी
जहां छलके ला अध्यात्म के गगरी
धन्य धन्य बा गया नगरी
बसल बा नालंदा,नवादा के कगरी
बसल बा औरंगाबाद के कगरी
बसल बा चत्तरा,हजारीबाग के कगरी
बसल बा कोडरमा के कगरी
हर साल पितृपक्ष में मेला लागेला
पिंडदान करे दुनिया भर से लोगवा आवेला
यहां बा बोधगया जहां दुनिया जहान आवेला
यहां बा बोधि मंदिर
यहां बा विष्णु पद मंदिर
यहां मंदिरन के खान बा
गया के जानत जहान बा
ह ई शहर अलबेला
बा ई शहर अकेला
पिंडदान करे में बा ई प्रथम स्थान पर
टिकल बा ई गयासुर के हृदय स्थान पर
ह ई विष्णु भगवान के नगरी
छलके ला यहां साहित्य के गगरी
छलके ला यहां संस्कृति के गगरी
ह ई जैन हिंदू बौद्ध के नगरी
जानता लोगवा सगरी
हमूं अईनी २०२३ में ई नगरी
ह ई सहज कुमार के नगरी
धन्य धन्य बा गया नगरी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'