सुनो,लड़कियों को पढ़ाओ
इनको आगे और बढ़ाओ
इनको सुसंस्कृत और बनाओ
इनको सारे संस्कार सिखाओ
इनको रोटी बनाना सिखाओ
पर इनको रसोईघर से बाहर लाओ
चक्की कहती है,"देखो,मेरे पाटों को
इनके बीच कितने सपने पीस गए"
मैं कहता हूं,सुनो! मेरी बातों को
न बनाओ बेटियों को शो-पीस नए नए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'