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यहां पितृपक्ष मेला में लोगों की भरमार है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आइए मेरे गया में
        
                                                    
                            
अध्यात्म की छाया में
भगवान विष्णु की माया में
गयासुर की काया में
महा बुद्ध के छाया में
पीपल की छाया में
फल्गु के छत्रछाया में
यह ऐतिहासिक शहर है
यह सांस्कृतिक शहर है
यह साहित्यिक शहर है
यह तीर्थ का शहर है
यहां जागरण हर प्रहर है
यहां लोग करते पिंडदान हैं
यहां लोग देते दान हैं
यहां श्रृषि लगाते ध्यान हैं
यहां विश्व विहार है
यहां बहार ही बहार है
यहां भिखना पहाड़ है
यहां सहज की दहाड़ है
यहां वेद मंत्रों का होता उच्चार है
यहां हर धर्म स्वीकार है
यहां बौद्ध विहार है
यहां हिंदू हजार हैं
यहां जैनी आते बार बार हैं
यहां बौद्ध आते बार बार हैं
यहां कोई करता फलाहार है
यहां किसी का दुग्ध आहार है
यहां कोई करता जलाहार है
यहां पितृपक्ष मेला में लोगों की भरमार है
यहां मिलता रोजगार है
यहां बड़ा बड़ा व्यापार है
यहां कई विद्यालय हैं
यहां विश्व विद्यालय है
यहां बहती ज्ञान की धारा है
यह गया हमारा है
यह बड़ा न्यारा है
यह बड़ा प्यारा है
आइए सड़क से
आइए रेल से
आइए वायु वान से
मैं भी आया गया में
आप आइए मेरे गया में।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
2 घंटे पहले
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