गया की पावन धरती
रही नहीं कभी परती
एक छोटा सा जहान
है गया की पहचान
दिसंबर महीने में
जनवरी महीने में
उतरता सारा संसार
दिखाता पूरा प्यार
बोधगया में बुद्ध
आकर किए शुद्ध
पितृपक्ष के मेला में
पिंडदान के मेला में
लगती भीड़ भारी
है पावन भूमि हमारी
संस्कृति की पहचान
है हमारा गया महान
है यह मेरा कर्म स्थान
है यह मेरा स्वर्ग स्थान
रचता मैं यहां रचना महान
बढ़ाता मैं गया की शान
है मेरा एक अरमान
हो मेरी गया से पहचान
बसे गया जी में मेरा प्राण
गया जी करें सबका त्राण
गया जी करें सबका कल्याण।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'