मैं ही सत्य हूं.. मैं ही निरंकार हूं
अदभुत हूं मैं..चारों दिशा हूं मैं
सर्वेश हूं मैं नीलकंठ हूं मैं
पुरुष हूं मैं..🌟 स्त्री भी हूं मैं.
शांत है, मैं प्रलय भी हूं
धर्मी हूं मैं अधर्मी का नाश भी हूं
अमृत हूं मैं 🌟 विष भी मैं हूं
परमसत्य हूं मैं झूठ भी मैं
पालनहार हूं और विनाशकारी भी
मुझे मानो तो सर्वेश हूं ना मानो तो तुच्छ
पत्थर की मूर्ति मैं हूं विश्वास हो तो
ना मानो तो वो मूर्ति केवल पत्थर
नो तो मैं हूं ना मानो तो केवल शब्द
- अंजू कंवर
जयपुर (राजस्थान)
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