तिरंगा जब नभ में लहराए,
मन में दीप हजार जलाए,
केसरिया साहस बन जाए,
श्वेत शांति का संदेश सुनाए।
हरा रंग समृद्धि की आशा,
चक्र कहे—चलते रहना,
भारत माँ की पावन माटी,
सीख सिखाए मिलकर रहना।
जिन वीरों ने प्राण लुटाए,
हँसकर फाँसी के फंदे चढ़े,
उनके त्याग की अमर कहानी,
आज भी हमारे दिल में गढ़े।
सीमा पर जो प्रहरी जागे,
तब हम चैन से सोते हैं,
उनके साहस की छाया में
हम सपनों के बीज संजोते हैं।
न जाति रहे, न भेद रहे,
न मन में कोई दीवार रहे,
हर भारतवासी के हृदय में
भारत माँ का प्यार रहे।
हम शिक्षा से दीप जलाएँ,
श्रम से देश महान बनाएँ,
सत्य, अहिंसा, प्रेम की राह पर
नव भारत का स्वप्न सजाएँ।
आज स्वतंत्रता-दिवस पर हम
एक नया संकल्प उठाएँ—
देश हमारा, मान हमारा,
इसकी शान सदा बढ़ाएँ।
जब तक साँस रहे इस तन में,
भारत का गुणगान रहे,
तिरंगा यूँ ही ऊँचा लहराए,
भारत सदा महान रहे।
- अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'