जाने कब फूल का चेहरा ये बिगड़ जाएगा
जाने कब रंग ये मौसम का उतर जाएगा
मैं किसी से नहीं कहता मगर क्या जाने
कब मेरे मन का ये फितूर चला जाएगा
जाने को कितनी ही चीजें भी चली जाती हैं
आदमी ये हंसता,खेलता भी चला जाएगा
आ के भी क्या ही कर सकते हो तुम पास मेरे
जब मेरे दिल से हर अरमान निकल जाएगा
वक्त आएगा कभी ऐसा भी जीवन में तेरे
सब चले जाएंगे और वक्त ठहर जाएगा
कुछ खबर इनकी भी ले रखो जिंदगी रहते
जाने कब जिंदगी का कारवां भी बिछड़ जाएगा