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जिंदगी जब जब भी मुस्कुराई है

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी जब जब भी मुस्कुराई है
        
                                                    
                            
मौत ने भी ली कहीं अंगड़ाई है
जिस आंगन में सुबह थे उजाले आए
वहीं पर शाम को बड़ी सी परछाईं है
कभी है लू तो कभी सर्द हवाएं हैं यहां
मौसम ने अपनी अदाएं हमें दिखलाई है
भर नजर देखता हूं सभी नज़ारों को
जैसे कायनात निगाहों में सिमट आई है
यह समझकर मैं अपनी राह चला चलता हूं
अपनी ये दुनिया चलाती कोई खुदाई है
एक महीने पहले
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