विज्ञापन

अब इस उधेड़बुन में गुजरते हैं शब ओ रात

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया के ग़म मिले, गमों की दुनिया मिली साथ
        
                                                    
                            
बातों की थीं उलझनें और उलझनों की रही बात
खुद की पुकार सुनने में जमाने लगा दिए
जो सुनते आ रहे थे जमाने की वाहियात
अब तक तो देखा सबने वक्त का ही हौसला
अब हौसले का वक्त है आएंगे कितने साथ
उम्मीद की जगह हो या जगह की हो उम्मीद
ये हाथ खाली ही रहे हम,मलते ही रहे हाथ
हो जिंदगी में उजाला या उजाले में जिंदगी
अब इस उधेड़बुन में गुजरते हैं शब ओ रात
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10386 कविताएं

View Profile

Pradeep Mukherjee

1239 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12525 कविताएं

View Profile