दुनिया के ग़म मिले, गमों की दुनिया मिली साथ
बातों की थीं उलझनें और उलझनों की रही बात
खुद की पुकार सुनने में जमाने लगा दिए
जो सुनते आ रहे थे जमाने की वाहियात
अब तक तो देखा सबने वक्त का ही हौसला
अब हौसले का वक्त है आएंगे कितने साथ
उम्मीद की जगह हो या जगह की हो उम्मीद
ये हाथ खाली ही रहे हम,मलते ही रहे हाथ
हो जिंदगी में उजाला या उजाले में जिंदगी
अब इस उधेड़बुन में गुजरते हैं शब ओ रात
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