विज्ञापन

चांद सूरज हैं निकलते भी हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जज्बा है जरा हसरतें भी हैं
        
                                                    
                            
प्यार है कुछ वहशतें भी हैं
दूर मुझसे रहो, ये अच्छा है
चाहत है यहां नफरतें भी हैं
सदियां कभी रुक जाती हैं
लम्हें यहां से गुजरते भी हैं
एक दिल है,दिलवर हैं कई
वादा करते हैं,मुकरते भी हैं
जो बुलंदियों पे काबिज हुए
कितनी नजरों से उतरते भी हैं
सिर्फ कहते ही नहीं हैं कुछ हम
हो जो दरकार तो करते भी हैं
शामो शहर रोज डूबते हैं मगर
चांद, सूरज हैं निकलते भी हैं
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8651 कविताएं

View Profile

SATYENDRA KUMAR

112 कविताएं

View Profile