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जो उलझा रहा अपने नफे के हिसाब में

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भर चला है दिल भी इश्क़ो अजाब से
        
                                                    
                            
मालूम हो रहा है उसके हर जवाब से
थी खौफनाक बात की आहट से भी मेरे
चेहरा नहीं हटाया था उल्टी किताब से
पहचान के भी आंखें मैं पहचान न पाया
चेहरा नहीं निकाला भी उसने नकाब से
था प्यार मेरा मै उसे पहचान न पाया
जब तक कि वो आने न लगा मेरे ख्वाब में
रूमानियत पहले मुझे कुछ नापसंद थी
पर जी मेरा लगता नहीं था इंकलाब में
क्या बात हो गई तेरे कस बल हुए ढीले
पहले चला भी करता था,अलग रुआब में
रंगत को लेके उसकी सिर्फ मैं चला आया
जो उलझा रहा अपने नफे के हिसाब में
6 घंटे पहले
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