विज्ञापन

हद को पार करने दूं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल है ऐसा निकाल कर दे दूं
        
                                                    
                            
वक्त इतना नहीं कहीं देखूं
आइने से बहुत ,लगाव मुझे
इसके टुकड़े हुए कहां फेंकूं
सर्द लहजे हैं इस जमाने के
भाप उठती,तेरे रुखसारों से
हाथ गलते हैं, मैं किधर सेकूं
आज हर छूट दे दिया इसको
ये जो चाहे वो आज करने दूं
आ ही जाती है सामने अक्सर
खुद को इस हद को पार करने दूं
4 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile